Air Pollution Hindi Essay, Air Pollution Essay, Hindi PDF

“Air Pollution Hindi Essay/Air Pollution Essay” वायु प्रदूषण आजकल प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दो में से एक है वायु प्रदुषण से प्रतिदिन लोगो के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा हैI वायु प्रदुषण से लोगो को स्वास सम्बंधित कई भयानक रोग हो रहे हैं जिसमें लोगों को साँस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है यहाँ तक फेफड़ो का रोग होने का प्रमुख कारण हवा का प्रदूषित होना ही हैI

इसके साथ-साथ वायु प्रदूषण अन्य शारीरिक अंगो को भी प्रभावित करता है प्रदूषित हवा में साँस लेने के कारण हमारा स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन ख़राब होता जा रहा हैI

इस निबंध में, मैंने air pollution Hindi essay, air pollution essay पर निबंध रूपरेखा सहित पर चर्चा की है। आशा करता हूँ कि आप सभी को इससे कुछ सिखने को मिलेगा

Water Pollution Essay Hindi

Air Pollution Hindi Essay, Pollution in hindi language

प्रस्तावना

वायु प्रदूषण आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं में से एक बन चुकी है। पिछले 50 वर्षों में हमारी दुनिया उस जगह से बदल गई है जहां वायु प्रदूषण सभ्यता के लिए खतरा नहीं था,
औद्योगीकरण के उदय के साथ, वायु प्रदूषण के प्रभावों को नियंत्रण में रखना अधिक कठिन हो गया है

वायु प्रदूषण सिर्फ हमारे देश की ही नहीं बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय समस्या बन गई है जिसने पृथ्वी पर बसने वाले सभी जीव जंतु व अन्य निर्जीव पदार्थो को अपने चपेट में ले लिया है इसका दुष्प्रभाव चारो ओर देखने को मिल रहा है|

वायु प्रदूषण का क्या अर्थ है?

वायु प्रदूषण से तात्पर्य हवा में जहरीली गैसों या कणों की उपस्थिति से है जो मनुष्यों और जानवरों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहें हैं। पहले वायु प्रदूषण की उतनी समस्या नहीं थी जितनी आज है। औद्योगीकरण की शुरूआत और जीवाश्म ईंधन के दहन से कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि हुई है। ये रसायन निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं: जैसे त्वचा रोग की समस्याएं आँखों में जलन गले की समस्या आदि

अगर देखा जाये तो प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ प्रकृति का संतुलन ख़राब होना, जीवन के लिए आवश्यक चीजो का दूषित हो जाना जैसे- पिने के लिए स्वच्छ जल न मिलना, प्रदूषित माहौल का पैदा होना आदि है

प्रदूषण के प्रकार

प्रदूषण के कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रकार वायु प्रदुषण, जल प्रदूषण मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण है |

इन सभी में से वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक माना जाता है इसका प्रमुख कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है | इस स्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में बाधा उत्पन्न कर रहा है| दिन प्रतिदिन बढते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण वृद्धि पर काफ़ी योगदान दिया है जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ा सम्बंधित कई तरह की स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याएं खड़ी कर दी है

वायु प्रदूषण के स्त्रोत

(1) वायु प्रदूषण के मानवीय स्रोत

» पेड़ कटाई पेड़-पौधे पृथ्वी के स्वच्छ वातावरण का बहुत बड़ा प्रमाण है ये कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करके हवा शुद्ध करने में अपना अहम भूमिका निभाते हैं| लेकिन आज के समय में पेड़ कटाई ज्यादा बढ़ गया है| जिसकी वहज से वायु दूषित हो रहा है और नई-नई बिमारियों पाँव पसार रही है|

» केमिकल कंपनियां केमिकल कंपनियां जब चालू रहती हैं तब इनके द्वारा हो रहे केमिकल के काम के वजह से शुद्ध वातावरण में घातक केमिकल की गैस शुद्ध वातावरण में फैल जाती हैं| जिसका खामियाजा सिर्फ मानव जाती ही नही बल्कि पुरे जीव सृष्टि को भुगतना पड़ता है

» गाडियों का धुआं गाड़ियों में इंधन का इस्तेमाल गाडियों को चलाने के लिए होता है इस इधन की वजह से गाड़ी चालू होते ही जो धुआं गाड़ी से निकलता है, वो हानिकारक केमिकल से भरी गैस होती है जो हवा में फैलते ही शूद्ध हवा को पूरी तरह से दूषित कर देते है

» नियमित घरेलू कार्य नियमित घरेलू कार्यो जैसे भोजन पकाने आदि कार्यों में इधन के रूप में लकड़ियां, कोयला, कंडे, केरोसिन, इत्यादी को दहन किया जाता है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, निकली है जो वातावरण में ज़हर घोलती है|

» परिवहन आज हमारे देश में यातायात-साधन जितने अच्छे होते जा रहे है उतना ही ज्यादा हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है, रेलगाड़ी, बस, ट्रक, आदि वाहनों से कार्बन-मोनो-ऑक्साइड उत्सर्जित होता है जिससे निरंतर वायु प्रदूषित हो रही है, खास कर महानगरो में

» तापीय ऊर्जा तापीय ऊर्जा सयंत्र जहाँ कोयले को जला कर बिधुत उत्पन्न की जाती है, जिसके फलस्वरूप अधिक मात्रा में कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड मुक्त होती है जो वातावरण को दूषित करती है

» परमाणु शक्ति आये दिन कई देश इसका परिक्षण करते रहते है यह एक इतना खतरनाक टेक्नोलॉजी है जो की होनी नही चहिये थी, यह मानवजाती को पूरी तरह से विनाश की क्षमता रखती है, इसके विकिरण का प्रभाव वातावरण में कई वर्षो तक रहता है, जिससे उस विशेष क्षेत्र में जीवन की सम्भावना न के बराबर हो जाती है

» आतिशबाजी शुभ कार्यों, त्यौहार आदि पर लोग आतिशबाजी करते है जिससे भारी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड निकलती है जो वायु प्रदुषण का कारण है

» पराली जलाना हरियाणा, पंजाब में बहुत बड़े-बड़े किसान होते है जो पराली को खेत में ही जलना उचित समझते है जिसके कारण वातावरण में कार्बन मिक्स हो जाता है, इसका उदाहरण दिल्ली है, अक्टूबर-नवम्बर के महीने में दिल्ली के आसमान में ज़हर घुल जाता है जिससे आम जनजीवन प्रभावित होता है

» ईंट का भट्ठा ईंट का भट्ठा भी वायु प्रदुषण में अपना अहम योगदान निभाता है, जनसंख्या विस्फोट, शहरीकरण तेजी से हो रहा है घर बनाने में ईंट की पहली जरूरत होती है, जिसके चलते नगरो, कस्बो गावों में ईंट का भट्ठा स्थापित किये जा रहे है, फलस्वरूप वातावरण प्रदूषित हो रहा है

(2) वायु प्रदूषण के प्राकृतिक स्रोत

» ज्वालामुखी विस्फोट सक्रिय ज्वालामुखी में जब विस्फोट होता है तो उनमें से हानिकारक गैसे जैसे कार्बन डाइऑक्साइड,कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड मुक्त होती है जो वातावरण को दूषित करती हैं

» जंगल आगजनी जंगल में पेड़ टूटकर आपस में टकराते है एक दुसरे से रगड़ने से उनमे आग लग जाती जो देखते-देखते पुरे जंगले को अपने आगोश में ले लेती है जिससे आधिक मात्रा में धुँआ उत्पन्न होता है जिसमे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड मौजूद होता है जिसके कारण वायु प्रदुषण होता है

» हानिकारक गैस कभी- कभी कुछ जहरीली गैस, मीथेन, आदि का रिसाव दलदली क्षेत्रो से होता रहता है जिससे वायु प्रदूषित होता है

Air pollutants, वायु प्रदूषक

» एरोसोल मतलब घुल-कण वातावरण में धुल कण अधिक मात्र में उपस्थित रहते है, जो वायु प्रदुषण का काम करते है अपने देश में विकशित देशो की तुलना में अधिक देखने को मिलता है

» कार्बन-मोनो-ऑक्साइड कार्बन-मोनो-ऑक्साइड उदासीन प्रकृति का होता है जो हिमोग्लोबिन से क्रिया करता है जिससे कारण श्वसन क्रिया में बाधा उत्पन हो जाती है, इसे दम घोटने वाली गैस भी कहते हैं| कार्बन-मोनो-ऑक्साइड अकेले 50% वायु प्रदूषण में भूमिका अदा करता है, यह बहुत खतरनाक गैस है

» सल्फर डाइऑक्साइड यह अम्लीय प्रकृति का होता है, यह फेफड़े को नुकसान पहुचाता है, इसे पत्थर का कुष्ठ रोग उत्तपन करने वाला भी कहते हैं, ताजमहल का पीलापन इसी के कारण हो रहा है

» सीसा/ Pb सीसा पेट्रोल में TET(टेट्राएथिल लेड) मिलाया जाता है ताकि इंजन में किसी प्रकार की अवांछित आवाज उत्तपन न करे, लेकिन इसका खामियाजा भी इन्सान को भुगतना पड़ रहा है, इसके दुष्प्रभाव से इन्सान की तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो रहा है, फलस्वरूप मानव में चिड़चिड़ापन का शिकार हो रहा है

» क्लोरोफ्लोरोकार्बन घरों में इस्तेमाल होने वाले एयर कंडीशनर, रेफ़्रिजरेटर से भारी मात्रा में CFC क्लोरोफ्लोरोकार्बन मुक्त होती है जो ओजोन परत को क्षति पहुचाती है ओजोन की मोटाई डाब्सन में मापी जाती है| अंटार्कटिका में ओजोन परत की सबसे ज्यादा क्षति हुई है क्योकि यह एक ठंडा इलाका है, जहाँ ठंड ज्यादा होगी वहां ओजोन में छेद होना तय है| ओजोन को सबसे ज्यादा क्षति क्लोरिन गैस से होता है और CFC में क्लोरीन पाई जाती है

» नाइट्रोजन डाइऑक्साइड NO2 यह वायुयान के धुआं से उत्सार्जित होता है| वायुयान समताप मंडल में उड़ता है और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ओजोन से क्रिया करके यह पेरोक्सीएसिटाइल नाइट्रेट नामक यौगिक बना लेता है जो देखने में बादल की तरह दिखता है|

» अम्लीय वर्षा अम्लीय वर्षा उस वर्षा को कहते है जिसका Ph 5.5 के आसपास आ जाता है, इसका 3 मुख्य कारण होते हैं

  1. HNO3
  2. NO2
  3. SO2

वर्षा का जल तो शुद्द होता है लेकिन ये HNO3, NO2, SO2 वातावरण में मौजूद रहते है जो वर्षा के जल में मिक्स हो जाते हैं जब ये पृथ्वी के सतह पर आते हैं तो अशुद्ध हो जाते हैं| इसलिए सीजन की पहली वर्षा में स्नान नही करना चहिये

» कार्बन डाइऑक्साइड यह एक अम्लीय प्रकृति की गैस है जिससे प्रदूषण नही होता, इसे ग्रीन हाउस गैस कहते हैं यह गैस ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार मानी जाती है| ग्लोबल वार्मिंग शब्द बेलीबेकल दिया था

ग्रीन हाउस का साधारण शब्दों में मतलब उमस (Humidity) से है इसका किस्सा जुड़ा हुआ है यूरोपीय देशों से जैसा की आप जानते है यूरोप में सर्दी अधिक पडती है इसलिए वहां के स्थानीय किसानों की सब्जियां ख़राब हो जाती थी इसके बचाव के लिए वे त्रिपाल का इस्तेमाल करके अपनी सब्जियों को कुछ दिन सुरक्षित रख पाते थें, इसमें क्या होता है की सूर्य की गर्मी (विकिरण) वापस त्रिपाल से नही निकल पाती है फलस्वरूप ताप बड जाता था जिससे उनकी सब्जियां आदि ख़राब होने से बच जाती थी

गर्मी के दिन में अगर आसमान में बादल छाया है तो उस दिन बहुत ज्यादा उमस होगी CO2, CH4, NO2 ये सभी ग्रीन हाउस गैसे है जिससे लगातार पृथ्वी का तापमान बड रहा है जो की एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है, अगर एसे ही चलता रहा तो पृथ्वी के दोनों पोल के बर्फ पिघलने लगेंगे जिसके फलस्वरूप समुंद का जल स्तर ऊपर उठ जायेगा समुन्द्र तटीय का नामोनिशान ख़त्म हो जायेगा, द्वीप जलमग्न हो जायेंगे, चारो तरफ तबाही का मंजर होगा

इसके रोकथाम के लिए 1997 में एक क्योटो प्रोटोकॉल जापान में समझौता किया गया जिसमें CO2 की मात्रा कम करने की कोटा (कार्बन क्रेडिट) बनाया गया, जिसमें सभी देशो को जिमेदारी के तौर पर एक मानक फिक्स कर दिया गया की आप इनती मात्रा से ज्यादा CO2 मुक्त नही कर सकते

» गाडियों का धुआं गाडियों से निकलने वाले धुआं में कार्बन-मोनो-ऑक्साइड होता है जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बहुत खतरनाक है इस खतरनाक प्रभाव को कम करने के लिए गाडियों में Catalytic converter लगया जाता है जिससे Catalytic converter (CO) कार्बन-मोनो-ऑक्साइड में एक और ऑक्सीजन का अणु बढाकर CO2 में बादल देता है हालाँकि CO2 भी हानिकारक है लेकिन CO से ज्यादा नही CO जानलेवा गैस है, और यदि पेट्रोल में सीसा मिला होगा तो यह Catalytic converter काम नही करेगा कार्बन-मोनो-ऑक्साइड ही मुक्त करेगा Catalytic converter संक्रमण धातु D-Block का बना होता है

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव

» मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव यदि वायु में अशुद्धियां है अथवा उसमें प्रदूषक तत्वों का समावेश है तो वह स्वसन द्वारा शरीर में पहुच कर विभिन्न प्रकार से प्रभावित करती है और अनेक भयंकर रोगों का कारण बन जाती है

» अम्लीय वर्षा अम्ल वर्षा के कारण धरातलीय सतह पर जल भण्डारो का जल तथा भूमिगत जल प्रदूषित हो जाता है

वायु प्रदूषण से सर्दियों में कोहरा छाया रहता है, इससे प्राकृतिक दृश्यता में कमी आती है तथा आँखों में जलन जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है

वायु प्रदूषण के कारण लगातार पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है जो भविष्य के लिए खतरे की घंटी है वायु प्रदूषण के कारण ओजोन परत भी पतली होती जा रही है

वायु प्रदूषण का वनस्पतियों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है| वायु प्रदूषण के कारण पौधों को प्रकाश कम मिलता है जिससे उनकी प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है|

उपर्युक्त प्रभावों के अतिरिक्त वायु प्रदूषण अन्य कई वस्तुओं को भी प्रभावित करता है जैसे- जंग लगना, कागज, कपडा, संगमरमर आदि का क्षीण होना| हाइड्रोजन सल्फाइड चांदी की चमक कम कर देता है तथा सीसे की वस्तुओं को काला बना दता है|

आज मानव जितनी अपनी सुख-सुविधा के लिए नयें-नयें तकनीकी आविष्कार कर रहा है प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से मानव जाती के लिए घातक साबित हो रहे हैं

वायु प्रदूषण को कैसे कम कर सकते हैं?

  • प्रदूषण को रोकने के लिए सबसे पहले सरकार को पेड़ की कटाई पर पूरी तरह से रोक लगनी होगी| अगर येसा संभव हो जाता है तो वातावरण में बढ़ा हुआ कार्बन डाइऑक्साइड का प्रभाव कम हो जायेगा| जिससे वातावरण शुद्ध हो जायेगा| और अधिक से अधिक वृक्षारोपण से सोने पे सुहागा साबित हो सकता है
  • दूसरा तरीका केमिकल उद्योगो पर पाबन्दी लगाना| क्योकि केमिकल के वजह से सिर्फ वायु प्रदूषण ही नही बल्कि जल प्रदूषित भी होता है
  • तीसरा उपाय है इलेक्ट्रिक वाहन| ईंधन युक्त वाहन से निकलने वाला धुआं पूरे वातावरण को दूषित कर देता हैI इसी लिए सभी देशो के सरकार को इस विषय को लेकर कदम उठाना चाहिए और इलेक्ट्रिक वाहनों को और ज्यादा बढ़ावा देना चाहिए

Air Pollution Essay in Hindi 100 Words, Essay on Air Pollution 100 Words

वायु प्रदूषण आज दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं में से एक बन चूका है। वायु प्रदूषण बच्चों और वयस्कों में सांस की बीमारी जैसे अस्थमा, हृदय रोग और स्ट्रोक में योगदान देता है। ग्लोबल वार्मिंग एक अन्य पर्यावरणीय समस्या है जो वायु प्रदूषण के कारण ही उत्पन्न हुई है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी का तापमान बड़ता जा रहा है जिससे महासागरों का जल स्तर बड़ता जा रहा है क्योकि लगातार ग्लेशियर पिघल रहे हैं। उद्योग और मोटर वाहनों द्वारा उत्पादित ग्रीनहाउस गैसें ग्लोबल वार्मिंग का एक प्रमुख कारण हैं। उद्योग और मोटर वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन का उपयोग करके और समाज द्वारा उत्पादित कचरे की मात्रा को कम करके वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने की सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए सभी को अपना योगदान देना पड़ेगा

Air Pollution Essay in Hindi 300 Words, Hindi essay on Air Pollution 300 Words

वायु प्रदूषण एक साइलेंट किलर है जिसे देखा नहीं जा सकता। यह अनुमान है कि हर साल 1.5 मिलियन लोग जहरीली गैसों और वातावरण में तैर रहे कणों से सांस लेने से बीमार हो जाते हैं। वायु प्रदूषण अस्थमा और तंत्रिका तंत्र की बीमारी चिडचिडापन, उम्र की कमी आदि गंभीर बीमारी के लिए जिम्मेदार है। समस्या केवल विकासशील देशों में ही नहीं है बल्कि यह एक वैश्विक समस्या बन गई है जो संयुक्त राज्य अमेरिका में भी अधिकांश बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। वायु प्रदूषण के कई स्रोत हैं। जीवाश्म ईंधन, ऑटोमोबाइल निकास धुएं, औद्योगिक प्रक्रियाओं और बिजली संयंत्रों को जलाना वायु प्रदूषण के कुछ सबसे बड़े स्रोत हैं। यहां तक कि खेतों और लॉन में रसायनों का उपयोग भी वायु प्रदूषण में योगदान देता है।

हम जिस हवा में सांस लेते हैं उसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड सहित कई गैसों और कणों का मिश्रण है। इनमें से सबसे खतरनाक कार्बन-मोनो-ऑक्साइड है, जो कोयला, वाहनों से निकलने वाले धुआं जैसे जीवाश्म ईंधन को जलाने से उत्पन्न होती है। कार्बन डाइऑक्साइड ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है। कार्बन डाइऑक्साइड वायु प्रदूषण में भी योगदान देता है, क्योंकि यह अम्लीय वर्षा का कारण है। ऐसा तब होता है जब कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में पानी के साथ मिल जाती है और कार्बोनिक एसिड बनाती है। कार्बोनिक एसिड एक कमजोर एसिड है और अपने आप में हानिकारक नहीं है। हालांकि, यह प्रदूषण का कारण बनता है तब जब यह वातावरण में अन्य रसायनों के साथ मिलकर अम्लीय यौगिक बनाता है। ये यौगिक बारिश या बर्फ के रूप में जमीन पर गिरते हैं। अम्लीय वर्षा के कारण पौधों की विनाश का कारण बन सकती है। जब फसलें वायु प्रदूषण के संपर्क में आती हैं, तो इससे उनकी संरचना बदल सकती है। यह मानव पाचन तंत्र के लिए समस्याएं पैदा करता है। अमेरिका में यह अनुमान लगाया गया है कि वायु प्रदूषण की कुल स्वास्थ्य लागत हर साल 100 अरब डॉलर से अधिक है।

वायु प्रदूषण पर 10 लाइन

  1. पेड़ों को काटने से गैसों में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है जिससे वायु प्रदूषण होता है
  2. वायु प्रदूषण के कारण अम्लीय वर्षा होती है,और इसके कारण ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन परत का क्षरण होता है
  3. वायु प्रदूषण के कारण मनुष्य, जानवरों और पशु पक्षियों को हानिकारक रोग प्रभावित कर रहे हैं
  4. वायु प्रदूषण को कम करने के लिए लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए
  5. वायु प्रदूषण प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों प्रदूषकों के कारण होता है
  6. ग्लोबल वार्मिंग के लिए बढ़ती चिंता के पीछे मुख्य कारणों में से एक वायु प्रदूषण है
  7. कण और गैसीय प्रदूषक हवा को दूषित करते हैं, निर्माण कार्यो और अन्य स्वार्थ के लिए पेड़ों को काटने से वायु प्रदूषण में भारी योगदान है
  8. वायु प्रदूषण से कई बीमारियों उत्पन्न हुई है जैसे त्वचा रोग, दिल का दौरा, स्ट्रोक, दमा आदि
  9. वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ पौधे लगाना आवश्यक है और ऐसा करने के बारे में सभी को तुरंत चिंतित होना चाहिए
  10. बढ़ता वायु प्रदूषण एक चिंताजनक विषय है और पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यधिक खतरा है

दिल्ली में वायु प्रदूषण पर निबंध

वायु प्रदूषण एक राष्ट्रीय मुद्दा है जो पूरे उत्तर भारतीय क्षेत्र को कवर करता है- पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार और यहां तक ​​कि पश्चिम बंगाल तक को भी, 20 अक्टूबर, 2019 तक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, वाराणसी देश का सबसे प्रदूषित शहर था, इसे दिल्ली के लिए भाग्यशाली कहें, या इसे दुर्भाग्यपूर्ण कहें, हमारा मीडिया मुख्य रूप से दिल्ली पर केंद्रित है,

ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान जो प्रदूषण के समय चलाया जाता है। जब प्रदूषण गंभीर केटेगरी से 24 घंटे या उससे ज्यदा देर तक रहता है

स्कूल कॉलेज बंद हो जाते हैं, निर्माण गतिविधियाँ ठप हो जाती हैं और ऑड-ईवन जैसे उपाय किए जाते हैं, अन्य राज्यों के लिए यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा कोई उपाय नहीं किया जाता है, वायु प्रदूषण को एक मुद्दा नहीं बनाया जाता है क्योंकि मीडिया उन पर ध्यान नहीं देत्री

“सफर” नामक एक सरकारी एजेंसी है जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तत्वावधान में आती है। जिसका फुल फॉर्म है सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग यह सरकारी एजेंसी हवा की गुणवत्ता पर नजर रखती है

और इसके बारे में काफी रिसर्च करती है। यह पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने पर है 2016-18 के बीच पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई लेकिन 2019 में 40% की वृद्धि हुई, यह पता लगाना मुश्किल है कि उनके बढ़ने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, लेकिन यहाँ सरकार की गलती है हरियाणा और पंजाब सरकार ने किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन देने में असमर्थ रहे हैं

आपके मन में एक सवाल उठ सकता है कि पराली जलाई ही क्यों जाती है आज से 50 साल पहले क्यों नही जलाई जाती थी कारण इसके पीछे छुपा है वो है संयुक्त यांत्रिक हार्वेस्टर 50 साल पहले, जब किसानों को अपनी फसल काटनी होती थी, तो वे इसे मैन्युअल रूप से हाथ से किया करते थे इसके बाद 1990 के दशक हार्वेस्टर (मशीने ) लोकप्रिय होने लगीं

इससे जब वे फसल काटते हैं, तो वे फसल के डंठल को छोड़ देते हैं जो लगभग सतह से 2 फीट ऊंचा होता है। किसानों ने अपना समय और पैसा बचाने के लिए, बचे हुए डंठल को काटने के बजाय, पूरे खेत में आग लगा देते है, ताकि वे जल्द से जल्द एक नया फसल उगा सके,

2009 के बाद से पराली जलाना तब और भी लोकप्रिय हो गया जब पंजाब और हरियाणा सरकार ने पानी बचाने के लिए एक कानून पारित किया, जिसके तहत उन्होंने किसानों को फसलों की बुवाई में मानसून के मौसम तक देरी करने का निर्देश दिया ( मतलब मानसून के ख़त्म होने के बाद) तो अगर किसान बुवाई में देरी करते हैं, तो कटाई में भी देरी होगी, तो पिछली फसल की कटाई और अगली फसल की बुवाई के बीच का समय कम हो जाता है,

तो किसानों ने सोचा कि सबसे आसान तरीका है पराली में आग लगा दे, क्योंकि बहुत कम दिनों का अंतर है पिछली फसल की कटाई और नई फसलों की के बिच

जब पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण का मुद्दा उठने लगा, और लोगों ने महसूस किया कि प्रदूषण पराली जलाने से हो रहा है, तब पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने कोशिश की पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए अलग-अलग तरीके इस्तेमाल किये , सबसे पहले, उन्होंने किसानों पर जुर्माना लगाने के बारे में सोचा जो पराली जलाने थे, उन्होंने 5000 रुपये / एकड़ का जुर्माना तय किया ,

लेकिन यह अप्रभावी और असफल साबित हुआ क्योंकि बहुत से किसानों ने महसूस किया कि जुर्माना देना सस्ता होगा। उनके खेतों में आग न लगाने के लिए एक और उपाय प्रस्तावित किया गया कि सभी पराली को जलाने के बजाय, हम इसे बायोमास संयंत्र में डाल सकते हैं और बिजली पैदा कर सकते हैं, यह अनुमान लगाया गया है कि यदि हम सभी पराली नहीं जलाते हैं, तो लगभग 2500 गीगा वाट बिजली एक साल में उत्पन हो सकती है।, लेकिन इस समाधान को भी ठीक से लागू नहीं किया जा सकता

ऐसा कोई प्रोत्साहन प्रदान नहीं किया जा रहा है जो इसे क्रियान्वित करने में मदद करे, यह कुछ स्थानों पर प्रयास किया गया है, लेकिन इसे बड़े पैमाने पर नहीं अपनाया जा सका

दिवाली की रात को पटाखों से बहुत ज्यादा हवा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है दिल्ली महानगर में कई दिनों तक कुहरे की तरह ज़हरीली गैस छाई रहती है जिससे लोगो को साँस लेना दूभर हो जाता है

Air Quality IndexParticulate Matter

301-500खतरनाक
201-300बहुत ही अस्वास्थ्यकर
151-200अस्वास्थ्यकर
51-150संवेदनशील समूहों के लिए अस्वस्थ
101-150संतुलित
0-50अच्छा

उपाय

इस तरह की स्थिति में आप ज्यादा कुछ नही कर सकते, यदि आप घर से बाहर निकल रहे हैं तो आपको एक N95 मास्क इस्तेमाल करना चाहिए

अपने घर में इंडोर पौधे जैसे मनी प्लांट, स्नैक प्लांट रख सकते हैं ये थोडा बहुत प्रदूषण रोकने में समर्थ हो सकते है| आप मीडिया और गवर्मेंट पर दबाव बना सकते है ताकि प्रदूषण जैसे मुद्दे प्राथमिकता बन पाए उन लोगो के लिए

वायु प्रदूषण pdf

उपसंहार

वायु प्रदूषण वास्तव में पुरे विश्व के लिए एक चुनौती है| अगर इस चुनौती से जल्दी नही निपटा गया तो आने वाले कुछ सालों में जिव-जन्तुओं का अस्तित्व ख़तरे में पड़ जायेगा, आने वाली पीढियां 25 साल की उम्र में 40 की दिखने लगेंगी, जिस प्रकार आज के दौर में प्रदूषण से बचने के लिए लोग फेस मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं उसी तरह आने वाले कुछ वर्षो में अगर इसी तरह प्रदूषण बड़ता रहा तो वो दिन दूर नही जब लोगो को बाहर निकलने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर का इस्तेमाल करना पड़ेगा,

इस निबंध में हमने Air Pollution Hindi Essay/Air Pollution Essay पर प्रकश डाला है उम्मीद करता हूँ इससे आपको सिखने को मिला होगा वायु प्रदूषण निबंध हिंदी में पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें

धन्यवाद

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